दो दिग्गजों का दबदबा
जब भी हवाई जहाज बनाने वाली कंपनियों की बात होती है, तो दो ही नाम दिमाग में गूंजते हैं, बोइंग और एयरबस। सच कहूँ तो, इन दोनों ने मिलकर पूरी दुनिया के कमर्शियल हवाई जहाज के बाजार पर लगभग 90% हिस्से पर कब्जा कर रखा है। अर्थशास्त्री इसे 'डुओपॉली' कहते हैं, यानी दो का राज। लेकिन एक निवेशक के तौर पर मेरे लिए जो बात सबसे दिलचस्प है, वह यह है कि इनकी आपसी होड़ बाकी सबके लिए एक शानदार मौका बना देती है।
सोचिए, जब बोइंग रिकॉर्ड डिलीवरी की घोषणा करता है, तो फायदा सिर्फ बोइंग के शेयरधारकों को नहीं होता। यही बात एयरबस पर भी लागू होती है। हर एक हवाई जहाज जो उनकी प्रोडक्शन लाइन से निकलता है, वह सैकड़ों सप्लायर्स की मेहनत का नतीजा होता है। इंजन बनाने वालों से लेकर लैंडिंग गियर और सीट बनाने वालों तक, हर कोई इस खेल का हिस्सा है। यह एक ऐसी स्थिति बनाता है जहाँ आप इंडस्ट्री की ग्रोथ का फायदा उठा सकते हैं, बिना यह शर्त लगाए कि बोइंग जीतेगा या एयरबस। आंकड़े खुद कहानी बयां करते हैं। दोनों कंपनियों के पास इतने ऑर्डर हैं कि उन्हें पूरा करने में कई साल लग जाएंगे। यह सिर्फ कागजों पर लिखे नंबर नहीं हैं, यह पूरी सप्लाई चेन के लिए आने वाले कई सालों के काम की गारंटी जैसा है।