जासूस, साहब और सॉफ्टवेयर
ज़रा सोचिए, हर दिन कितना डेटा पैदा होता है. हम सैटेलाइट तस्वीरों, अरबों वित्तीय लेन-देन, सोशल मीडिया पोस्ट्स और अनगिनत संचार चैनलों की बात कर रहे हैं. इंसानी विश्लेषकों की कोई भी फौज, चाहे वह कितनी भी कॉफी पी ले, इस डेटा के सैलाब का मुकाबला नहीं कर सकती. यहीं पर टेक्नोलॉजी के नए महारथी मैदान में उतरते हैं, जो इस शोर में से संगीत निकालने का काम करते हैं.
उदाहरण के लिए पैलंटिर टेक्नोलॉजीस जैसी कंपनी को लीजिए. यह इस क्षेत्र का एक तरह से पोस्टर चाइल्ड बन गई है, जिसने सैन्य अभियानों से लेकर कॉर्पोरेट सप्लाई चेन को अनुकूलित करने तक, सबसे मुश्किल माहौल में अपनी काबिलियत साबित की है. फिर बूज़ एलन हैमिल्टन जैसे पुराने और स्थापित खिलाड़ी भी हैं. ये वो भरोसेमंद सलाहकार हैं जिनके पास सरकारें तब जाती हैं जब उन्हें ऐसे जटिल और मिशन के लिए महत्वपूर्ण सिस्टम लागू करने होते हैं. यह कोई वैकल्पिक आईटी अपग्रेड नहीं है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ज़रूरी बुनियादी ढाँचा है. और इन सबके पीछे स्नोफ्लेक जैसी कंपनियाँ हैं, जो वह मूलभूत डेटा प्लेटफॉर्म मुहैया कराती हैं जिसके बिना यह विश्लेषण संभव ही नहीं है. सीधे शब्दों में कहें तो, ये डिजिटल सोने की खान में फावड़ा और कुदाल बेच रहे हैं, और हर कोई सोना खोजना चाहता है.