निवेश का नज़रिया और जोखिम का गणित
चलिए, अब ज़रा हकीकत की ज़मीन पर आते हैं। कुछ साल पहले तक हर कोई कह रहा था कि 2020 तक सड़कें ड्राइवरलेस गाड़ियों से भर जाएँगी। ज़ाहिर है, ऐसा नहीं हुआ। यह तकनीक उम्मीद से कहीं ज़्यादा मुश्किल साबित हुई है। लेकिन एक निवेशक के तौर पर, मेरे लिए यह अच्छी खबर है। शुरुआती हवाबाज़ी खत्म हो गई है और अब मैदान में केवल वही कंपनियाँ बची हैं जिनके पास असली तकनीक और एक मज़बूत बिजनेस मॉडल है।
संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। कुछ रिपोर्ट्स का अनुमान है कि 2030 तक यह बाज़ार सैकड़ों अरब डॉलर का राजस्व पैदा कर सकता है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है। जोखिम भी उतने ही बड़े हैं। कई देशों में अभी तक नियम-कानून स्पष्ट नहीं हैं। तकनीकी चुनौतियाँ लगातार सामने आ रही हैं। और सबसे बड़ी बात, क्या आप और मैं पूरी तरह से एक रोबोट पर भरोसा करके गाड़ी में बैठने को तैयार हैं? यह सवाल अभी भी बना हुआ है। किसी एक कंपनी पर अपना सारा पैसा लगाना, मेरे हिसाब से, समझदारी नहीं होगी। विविधीकरण, यानी अपने निवेश को फैलाना, यहाँ महत्वपूर्ण हो सकता है।
तो क्या आपको इस दौड़ में शामिल होना चाहिए? यह फैसला आपका है। लेकिन यह एक ऐसी क्रांति है जिसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा। बस याद रखिएगा, इस सड़क पर रफ़्तार तेज़ है, पर स्पीड ब्रेकर भी बहुत हैं।